आगे आओ – तुम भी बात कर सकते हो

This blog has been translated and transcribed by Rupal Hariyaow.

– ज्योति हनोटे

१ फरवरी को हम सादरी गांव में आये, और यहाँ के लोगों से मिले। महिलाओं, युवाओ, और किशोरियों से मिले और उनसे गांव की संस्कृति, शिक्षा और यहाँ के इतिहास के बारे में कुछ जानकारी ली। हमने हमारी टीम के साथ यहाँ की शिक्षा के बारे में जाना, और तब हमे पता चला कि यहाँ पर शिक्षा का स्तर तो ठीक है, लेकिन किशोरियों को शिक्षा के अलावा उनके स्वास्थ्य से सम्बंधित जो जानकारी मिलनी चाहिए वो उन्हें ना ही अपने घर में अपनी माँ से मिलती है, और ना ही स्कूल में अपने टीचर से मिलती है।

फिर हमने अपनी टीम के साथ लड़कियों को माहावारी से सम्बंधित जानकारी देने के लिए उनसे बात करने का विचार किया और स्कूल में गए | हमने स्कूल के प्रिंसिपल से बात की कि हम किशोरियों के स्वास्थ्य पर यहाँ पर एक कार्यक्रम करना चाहते हैं । हम आभारी हैं स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर्स के, क्योंकि उन्होंने हमे इस कार्यक्रम को स्कूल कैंपस में करने की अनुमति दी। हम जतन की कार्यकर्ता सुमित्रा जी को भी धन्यवाद् करते हैं, जिन्होंने इस कार्यक्रम में एहम भूमिका निभाई और उन्होंने गर्ल्स हेल्थ पर बहुत अच्छी जानकारी दी|

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माहवारी के विषय में इससे पहले ऐसा कोई भी कार्यक्रम नहीं हुआ था न ही बात हुई थी। किशोरियों को बताया गया कि यह एक अच्छी चीज़ है और प्रकृति की देन है। उस समय लड़कियों को अपना खाना पीना सभी चीज़ों का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए – इसके प्रति जो गलत धारणा है उसे धीरे-धीरे बदलना चाहिए । स्कूल में जो किशोरियों से माहवारी को लेकर बात हुईं उसका प्रभाव ये पड़ा कि उसमे तीन किशोरियां खुद से आगे आई, उन्होंने अपनी समस्या बताई और उनकी समस्या का समाधान करने के लिए माहवारी सेशन गर्ल्स हेल्थ पर जो कार्यक्रम किया गया था वह मेरे लिए बहुत ही अच्छा और दिलचस्प था । इसमें पर्ची बनाई गई थी और एक-एक पर्ची उठाकर उन्हें पढ़वाया गया और फिर उसके बारे में बताया गया |

माहवारी कार्यक्रम के दौरान मेरी बहुत सारी किशोरियों से एक साथ बात हुई और एक किशोरी ने अपनी माहवारी सम्बंधित समस्या बताई – यह मेरे लिए बहुत अच्छा था और उसका समाधान भी किया गया। इससे पहले उसे इस बात को करने का मौका नहीं मिला था । उसने अपनी बात रखी, मेरे लिए भी यह एक नया अनुभव था क्योंकि इसके ज़रिये हमारा एक नया रिश्ता बना । इससे पहले इस विषय पर कभी भी बात नहीं हुईं थी और हमने उन्हें एक ऐसी जगह दी जिसमे वो अपनी बात खुलकर कर सकती हैं ।

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– Jyoti Hanote

On 1st of February, our team reached Sadri village and met with people residing here. We met with women, youth and teenage girls and acquired some information about the culture, education and history of the place. Our team realized that the level of education in the village is quite satisfactory. However, along with formal education teenage girls should get health related teachings as well which they neither get at home from their mothers nor do they get it at school from their teachers. Our team decided to talk to these young girls regarding menstrual health so as to create awareness around the topic.

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With this in our heads we went to the school and talked to the Principal telling him about our intention to conduct a programme on Girl’s Health. We are very grateful to the Principal and teachers for allowing us to use school campus to run the session. We are also very thankful to Sumitra ji who works with Jatan Sansthan as she played a very significant role in the programme by sharing great amount of knowledge on girl’s health with us all. This was the first time when a session like this on a topic like menstruation was conducted here. Teen girls were told how they can talk about periods without any apprehensions with their mother, sister or friends. We explained to them that periods are natural and there is nothing wrong about it and it’s us who can change the stigmas that surround it. We also explained to them about taking extra care of their diets during these days.

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The impact of session on menstrual health was such that three girls came forward to open up about the problems they face during periods and got solutions to those problems. For me this session on menstrual health was very interesting as we had made various posters and each poster was read out loud and was explained afterwards. I found it all really good.

Before this session these girls had never got a chance to even talk about the topic. This was a fairly new experience for me as well as we ended up making new relationships by having this kind of conversation. We provided these girls with a space where they can freely speak their minds and say whatever they want.

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(Jyoti Hanote volunteered with Pravah ICS from January – April 2017 and was placed with partner organisation Jatan Sansthan in district Rajsamand.)

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